मुझे भी खबर कर
तेरे आने की
ज़िद कब से ये मैं
लिए बैठा हूँ
हुआ था जो रुखसत
गई रोशनी थी
तेरे संग से मैं
उजाला बना हूँ
कभी और भी जब
तेरी बात होगी
सांसों में गर्मी
बेतरह देखता हूँ
सवालों में कुछ भी
नया तो नहीं है
फिर भी नए मैं
सिलसिले देखता हूँ
©सुनील_सोनी
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