सोमवार, 4 जनवरी 2021

दीवाना (ग़ज़ल 15)

 साये के साथ

रंग हैं नहीं

जो छोड़ता कभी कहीं

कब कहाँ जाएंगे नहीं

वहीं कहीं नहीं सही

यहीं अभी सही यही

हमसफ़र सफ़र में नहीं

साया कभी साया नहीं

रंग सुर्ख़ सुर्खी में नहीं

लहू छलक आया नहीं


©सुनील_सोनी

©SuneilSoni

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दिवाली की शुभकामनाएं

कविता : सुनील  स्वर : अर्चना वीडियो संपादन : गार्गी