तकिये के नीचे किताब रखकर सो गए
आँसुओं से भीगा गुलाब फिर यूँ खिल गया
बारिशों की याद में ख्वाब तेरा छू गए
रात हुई तमाम तो किस्सा कोई यूँ खिल गया
हर गली चाँद निकला हम कहीं खो गए
उलझनें सुलझाईं तो चेहरा तेरा यूँ खिल गया
©सुनील_सोनी
समाज का सबसे बड़ा सरोकार यानी प्रेम छीजता जा रहा है. लिहाजा, मेरी कविताओं में आपको प्रेम ही केंद्रबिंदु नज़र आएगा. मेरे और दो प्रिय विषय हैं : पहला सिनेमा और समाज; और दूसरा राजनीति के मार्फत समाज और समाज के मार्फत जन.
कविता : सुनील स्वर : अर्चना वीडियो संपादन : गार्गी
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