सोमवार, 4 जनवरी 2021

यूँ

 तकिये के नीचे किताब रखकर सो गए

आँसुओं से भीगा गुलाब फिर यूँ खिल गया


बारिशों की याद में ख्वाब तेरा छू गए

रात हुई तमाम तो किस्सा कोई यूँ खिल गया


हर गली चाँद निकला हम कहीं खो गए

उलझनें सुलझाईं तो चेहरा तेरा यूँ खिल गया


©सुनील_सोनी

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दिवाली की शुभकामनाएं

कविता : सुनील  स्वर : अर्चना वीडियो संपादन : गार्गी