सोमवार, 4 जनवरी 2021

तू भी, तू ही (ग़ज़ल 14)

 तू भी, तू ही


इस फ़साने में जहाँ भी तेरा नाम होगा

शक़ नहीं वहीं मेरे दिल का मुकाम होगा


फरिश्तों ने भी आज़माए हैं अमल सारे

गुजरेगी तू जहाँ से वहीं मेरा नाम होगा


सवालों के जो भी निकलेंगे सफे

देखना जवाबों में मेरा नाम होगा


कोई कह दे बिगड़ा तो मान लूंगा

नशा भी तेरा है, तेरा ही नाम लूंगा


बहुत दूर हैं गलियां दिल की तेरे बिन

जिस तरफ निकलूंगा, तेरा नाम लूंगा


बहुत दूर हैं गलियां दिल की तेरे बिन

जिस तरफ निकलूंगा, तेरा नाम लूंगा


पनाहों में तेरी दिल तभी रख दिया था

छोड़ूंगा जब भी दुनिया तेरा नाम लूंगा


हर शहर तेरा हर बसर तेरा

जब भी बसूँगा तेरा नाम लूंगा


इबादत के बाज़ार मुमकिन नहीं हैं

पढूंगा दुआ किसी दिन तो तेरा नाम लूंगा


सतह पर सितारों की जाकर हो बैठे

चाँद शिकवा करेगा तो तेरा नाम लूंगा


©सुनील_सोनी

©Sunil Soni


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दिवाली की शुभकामनाएं

कविता : सुनील  स्वर : अर्चना वीडियो संपादन : गार्गी