सोमवार, 4 जनवरी 2021

हे ! राम !!

 हे ! राम !! सिया राम !!

माया का कैसा जाल बुना है

रूप तुम्हारा ही धरकर

रावण चहुंओर खड़ा है

दस नहीं, हज़ारों अब तो

मुख पर सुविध श्रृंगार है

कितना सुंदर वेश रचा है

मोह में कहीं फंस न जाऊं

मैया सीता ज्यूँ हर न जाऊं

धर्म के छद्म में अधर्म खड़ा है

सच की छाती पर झूठ चढ़ा है

मति मेरी सुध भी रखना राम

अरज

हे राम ! हे राम !!


©सुनील_सोनी

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दिवाली की शुभकामनाएं

कविता : सुनील  स्वर : अर्चना वीडियो संपादन : गार्गी