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सोमवार, 11 जुलाई 2022

बारिश

बारिशों में भीगें और तुम नहीं तो क्या मज़ा

उल्फतों में मिलके न भीगे तो बताओ क्या मज़ा


बूँदों ने समझा ज़ुल्फ़ घटा-सी तेरी छाई है

इश्क़ में ऐसा भरम न चलता रहे तो क्या मज़ा


ख़्वाब में ही भीगना सच में हो जाना तरबतर

ख़्याल बादल-सा न उमड़ा तो बताओ क्या मज़ा


छिपके बिजली-सा चमक के गिर जाना दस्तूर है

बिजलियों में अक्स तेरा न उभरे तो क्या मज़ा


पानी की रवानी के किसी किस्से में तुझको खोजना

दरिया-सा बहकर बहके नहीं तो बहने का क्या मज़ा


शबनम ढलकती ही रही गालों पे तेरे रातभर

सफर में राहें हमनवां की बदलें नहीं तो क्या मज़ा



-सुनील सोनी

सोमवार, 4 जनवरी 2021

कहता हूँ (नज़्म )

 गली से गुज़रता हूँ रोज़

होती है तो नहीं देखता

नहीं होती वो तो

खोजता हूँ मैं


सूरत कोई नहीं

एहसास सा है

नहीं होता महसूस

तो रोज़ मरता हूँ मैं


अज़ब ढंग हैं

निराले दस्तूर

इश्क़ मुक़्क़मल हो तो

दास्तानें नहीं बनतीं


जी हुज़ूर कह दें

मन में घुलता है शहद

शायद अरमानों में

कोई बादशाह बैठा है


अंधेरे रोशनी हमदम हैं

बिछड़ते रूठते रहते हैं


बेपरदा

लिख लूंगा फ़िर किसी दिन कविता

अभी फ़ुरसत से देख तो लूँ तुम्हें


©सुनील_सोनी

क्यों

 जो पैर ज़मीं पर नहीं पड़ते

उनका ज़मीं पर गुजारा क्योंकर हो?

जिन्होंने सपने नहीं देखे

उनका आसमां पर किनारा क्योंकर हो

जिन्होंने कभी नदी की रेत नहीं देखी

पहाड़ों का उन्हें नज़ारा क्योंकर हो


©सुनील_सोनी

समझ

 हुस्न ओ दानिश के अमल को समझ लें

लैला में कैस ने जो जाना वो क्या अलग था

©सुनील_सोनी

वीराना (ग़ज़ल)

 सन्नाटों में दिल के वीराना भी जुड़ गया

याद का धुआँ उठा औ आँखों से बह गया


दोस्तो के हाथ में ही था ज़िम्मा चिराग का

ज़माना मुड़ा तो वफ़ा का ख्वाब बह गया


ज़ुल्मत से आरज़ू क्या किसी ने की होगी

मेरे वक़्त ए आफ़ताब का किस्सा सो गया


साँसों का भरम जोर का झोंका ले गया

हासिल कुल जमा ख़्वाब तनहा रह गया

 

©सुनील_सोनी


शनिवार, 4 जून 2016

प्रेम

प्रेम तुम चिरैया हो
या खेत
नहीं; तुम पानी हो
जो आसमान से बरसता है
या बहता है किसी नदी से
और बरसता है झरने से
हरेक लम्हा तुम हो
हर कण भी
इसलिए धूल में लोटा हूँ मैं
क्योंकि मैं न रहूँ
यकीन तुम ही हो
और
संदेह तक
कहना
या
न कहना
क्षितिज से मिलती धरती
तुम्हारा होना है
तुम हो वहाँ
जहाँ नहीं हो
मैं भी तुम
तुम मैं हूँ
हर तरफ

-सुनील सोनी 03/06/2016

दिवाली की शुभकामनाएं

कविता : सुनील  स्वर : अर्चना वीडियो संपादन : गार्गी