मंगलवार, 31 अगस्त 2021

मर्ज़ी

 

हम तो चले जाएंगे याद करते करते

चले आना न आना उनके हाथ है

सुबह खिलखिलाना शाम को रूठ जाना
मना पाऊँगा क्या सब उनके हाथ है

बीत जाएंगी घड़ियां ज़माने भी गुज़रेंगे
ज़िंदगी कैसे गुज़रे सब उनके हाथ है

अंधेरे का असर है भोर की बज़्म तक
दीप जलाएं न जलाएं उनके हाथ है

कभी सुनता था अब भी सुनता आया हूँ
साथ होगा न होगा सब उनके हाथ है

©सुनील सोनी

दिवाली की शुभकामनाएं

कविता : सुनील  स्वर : अर्चना वीडियो संपादन : गार्गी