मर्लिन की गाथा
‘‘सेक्स सिम्बल बनना एक वस्तु बन जाना है. मैं वस्तु होने से नफरत करती हूं. लेकिन, मैं सेक्स सिम्बल के बजाय किसी और चीज का सिम्बल बनना चाहती हूं. मैं यकीन करती हूँ कि मैं एक अभिनेत्री बनना चाहती हूं. अपनी इंटीग्रिटी के साथ एक अभिनेत्री . मैं सचमुच एक अदाकारा बनना चाहती हूँ, एक कामोत्तेजक जीव नहीं.’’
1949 में मर्लिन की फिल्म ‘जेंटलमेंस प्रिफर ब्लॉन्ड्स’ में जो गीत है, ‘डायमंड्स आर अ गल्र्स बेस्ट फ्रेंड्स’; वह उसकी जिंदगी पर खरा उतरता है. वह अपने लिए जिंदगी भर डायमंड्स इकट्ठे करती रही, ताकि पुरुषों के खोखले समाज में उसे इज्जत मिल जाए, पर वो उसे मिला नहीं.
संभवत: उसे मृत्यु से प्यार था..
कयास ही है, पर अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी और उसके बीच प्रेम का अंकुर फूट चुका था.. उसने अपना आखिरी फोन कैनेडी को ही किया था.. यह एक रहस्य रहा, जिसकी तस्दीक कभी नहीं हो पाई.. उसकी जिंदगी के अंत के रहस्यों के कई किस्से हैं, पर मर्लिन को न समझ पाना ही इसका अंत है.
मधुबाला जैसी..
दोनों की मौत रहस्य का पिटारा है..
मर्लिन मुनरो की मृत्यु के ६० साल पूरे होने पर...
यह अकथ कथा है, ऐसी उदास परी की, जो जिंदगी भर उस चीज के लिए पहचानी गई, जो उसे असह्य थी..
‘दि सेवेन इयर ईच’ में वो मशहूर ‘स्कर्ट ब्लो’ वैसे मर्लिन का मिजाज नहीं बताता, जिसकी बातें सबसे ज्यादा होती हैं.
कोई उसकी समंदरी नीली आंखों पर, कोई सुनहरी जुल्फों या रक्ताभ लिपिस्टिक रंगे होठों पर फिदा हो सकता है; और कोई संगमरमरी जिस्म या शोख अदाओं पर दुनिया न्यौछावर कर सकता है..
लेकिन, कौन देखता है कि सफलता के अंधेरे अनंत होते हैं. 9 साल में बलात्कार की यातना, दुकान की नौकरी पर बीता बचपन, 16 की उम्र में खुदकुशी की कोशिश..
बचपन की बदसूरती के चलते खूबसूरती के आग्रह का दु:ख उसके कितने भीतर तक धंसा था, इसका अंदाजा उसी के कथन से लगाइए..
‘‘मैं जब बच्ची थी, तब मुझसे किसी ने कभी नहीं कहा कि मैं सुंदर हूं. तमाम बच्चियों से कहा जाना चाहिए कि वे सुंदर हैं. वे सुंदर न हों तब भी.’’
असहाय और सहायता के उसके सपने, जिसमें उसने देखा कि वह चर्च में जमीन पर लोट रहे जनसैलाब के सामने निर्वसना खड़ी है.. लोगों के सिर बचाने के लिए पंजों के बल चल रही है.
मर्लिन 1926 में जन्मी. उनकी मां मानसिक रोगी थीं. लिहाजा, ज्यादातर बचपन अनाथाश्रम अथवा दूसरों के घर में बीता.
36 साल की छोटी-सी जिंदगी और बड़ी कामयाबी. 1946 में उसे फिल्मों में काम मिल गया. एक साल के भीतर ही 30 बड़ी फिल्म उसके खाते में थीं.
मॉडलिंग से पहले पॉर्न फिल्म से शुरू हुआ सिलसिला उसे हॉलीवुड में सर्वोच्च शिखर तक ले गया. वह वहां अकेली और भयभीत थी. सफलता के शिखर पर भी उसका जीवन उतना ही अवास्तविक था जितना एक स्वप्न..
उसे मेकअप, कैमरों और स्टूडियो से घृणा थी, पर उसके बिना वह जी भी नहीं पाती थी..
लेकिन, कौन देखता है कि सफलता के अंधेरे अनंत होते हैं. 9 साल में बलात्कार की यातना, दुकान की नौकरी पर बीता बचपन, 16 की उम्र में खुदकुशी की कोशिश..
बचपन की बदसूरती के चलते खूबसूरती के आग्रह का दु:ख उसके कितने भीतर तक धंसा था, इसका अंदाजा उसी के कथन से लगाइए..
‘‘मैं जब बच्ची थी, तब मुझसे किसी ने कभी नहीं कहा कि मैं सुंदर हूं. तमाम बच्चियों से कहा जाना चाहिए कि वे सुंदर हैं. वे सुंदर न हों तब भी.’’
![]() |
| उदास परी |
मर्लिन 1926 में जन्मी. उनकी मां मानसिक रोगी थीं. लिहाजा, ज्यादातर बचपन अनाथाश्रम अथवा दूसरों के घर में बीता.
36 साल की छोटी-सी जिंदगी और बड़ी कामयाबी. 1946 में उसे फिल्मों में काम मिल गया. एक साल के भीतर ही 30 बड़ी फिल्म उसके खाते में थीं.
मॉडलिंग से पहले पॉर्न फिल्म से शुरू हुआ सिलसिला उसे हॉलीवुड में सर्वोच्च शिखर तक ले गया. वह वहां अकेली और भयभीत थी. सफलता के शिखर पर भी उसका जीवन उतना ही अवास्तविक था जितना एक स्वप्न..
उसे मेकअप, कैमरों और स्टूडियो से घृणा थी, पर उसके बिना वह जी भी नहीं पाती थी..
उसका असली ख्याल यह था..
![]() |
| मर्लिन की एक जानलेवा अदा |
इसलिए उसने कभी जो कहा था..
‘‘हॉलीवुड में किसी भी लड़की की प्रतिभा इस बात से आंकी जाती है कि वह कैसी दिख रही हैं, इस पर नहीं कि वह असल में हैं क्या. हॉलीवुड ऐसी जगह है, जहाँ आपको चुंबन के लिए हजार डॉलर्स मिल जाएंगे. लेकिन, आत्मा के लिए 50 सेंट्स भी नहीं. मैं यह जानती हूं और मैं महंगा ऑफर ठुकरा देती हूँ और 50 सेंट्स मंजूर कर लेती हूँ.’’
...पर प्रेम कहां था?
बेसबॉल स्टार जो डिमैगियो और नाटककार ऑर्थर मिलर से दुखांत और नाकाम विवाह उस दु:ख-गाथा का अध्याय हैं. समूची जिंदगी में वह सच्चे प्रेम के लिए तरसती रही और अंतत: नाकामी ने उसे मृत्यु-मार्ग सुझाया.
जिमी डोहर्टी से मर्लिन ने 16 की उम्र में पहली शादी की, जो बहुत नहीं चली. सफलता के दौरान 1954 में उनकी मुलाकात डिमैगियो से हुई. महज 9 महीनों में ये रिश्ता खत्म हो गया. मिलर ने उसके साथ 5 साल बिताए, पर प्रेम कहां था?
बस यही डायरी में उसने लिखा..
‘‘मैं अपनी शादी की वजह से दु:खी नहीं थी. लेकिन, इससे मैं खुश भी नहीं थी. मैं और मेरे पति मुश्किल से ही एक-दूसरे से बोल पाते थे, और यह सब इस वजह से नहीं था कि हम एक-दूसरे से नाराज थे. हमारे पास कहने को कुछ नहीं था. मैं इस ऊबाऊपन से मर रही थी. मेरी पैसों में कतई दिलचस्पी नहीं थी, मैं तो बस वंडरफुल होना चाहती थी. करियर वंडरफुल था. लेकिन एक ठंडी रात में उसे आप लपेट नहीं सकते थे. मैं कैलेंडर पर जिंदा रहूँगी, समय में कभी नहीं.’’
![]() |
| तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो... |
उसने कहा था..
‘‘मैं बिना फेस लिफ्ट कराए बूढ़ी होना चाहती हूँ. मैं चाहती हूँ कि मुझमें अपने उस चेहरे के प्रति भरोसेमंद रहने का साहस हो, जिसे मैंने बनाया है. कभी-कभी मुझे लगता है उम्रदराज होना टाला जा सकता है और जवान रहते मर जाएं तो बेहतर. लेकिन, तब आप अपनी जिंदगी पूरी नहीं करते. तब आप कभी भी अपने को पूरी तरह से नहीं जान पाएँगे.’’
कहते हैं कि 5 अगस्त 1962 में मर्लिन ने अपनी ही दवा से अपनी जान ले ली.. 5 अगस्त 1962 को लॉस एंजिल्स में अपने घर के शयनकक्ष में मर्लिन मृत मिलीं. घर की देखभाल करने वाली महिला ने तड़के डॉक्टरों को फोन करके बुलाया. दोनों डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. शयन कक्ष बंद होने के कारण उन्हें दरवाजा तोड कर कमरे में घुसना पड़ा. मर्लिन अपने पलंग पर निर्वसना पड़ी पाई गईं. नींद की गोलियों की शीशी उनकी बगल में मिली. अधिकारियों ने बाद में कहा, ‘‘शायद मर्लिन ने आत्महत्या की.’’ लेकिन,अब तक खुदकुशी की थ्योरी पर लोगों को संदेह है..
शायद वह इस बार भी संभवत: प्रेम में नाकाम हो गई थी..
![]() |
| राष्ट्रपति कैनेडी के साथ मर्लिन |
पता नहीं क्यों मर्लिन और मधुबाला की तुलना को जी चाहता है...
धरती पर सौंदर्य की देवी ‘वीनस’ के दोनों अवतारों में महज नाम के हिज्जों के आरंभाक्षर का साम्य न था.
दोनों एक ही कालखंड की पैदाइश थीं.
एक पश्चिम और दूसरी पूरब में.
दोनों के फिल्मी नाम मूल नाम से बदले हुए. एक का नोरमा जीन्स मॉरटेंसन. दूसरी का मुमताज से मधुबाला.
दोनों ने कम उम्र में काम शुरू किया और अपार सफलता और ख्याति पाई.
दोनों की उम्र 36 साल.
दोनों जीवन भर प्रेम ढूंढती रहीं...






कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें