मंगलवार, 22 फ़रवरी 2022

वादे

 वादे हैं ख़ूब औ उनको निभाने का अदब है

उलझे हुए धागों को सुलझाने का सबब है


मैं जगा दूं तो दिखा देना उम्मीदों का सबेरा

तरन्नुम में हर इक नग़मा गाने का सबब है


वो जाता है और जताने में कसर नहीं बाक़ी

हर लम्हा फ़िर तसव्वुर में जीने का सबब है


कोई आए तो मुनासिब है रौनक़ भी लौटे

हमारे ख्वाबों में हर सू उजाले का सबब है


जो जाता है, अच्छे से विदा कर दो उसको

जो आया है, उसके गले लगने का सबब है

दिवाली की शुभकामनाएं

कविता : सुनील  स्वर : अर्चना वीडियो संपादन : गार्गी