कहता हूँ ख़ुद और ठहर जाता हूँ
ठिठकता हूँ, फिर जाग जाता हूँ
अँधेरे इंतहाई मेरे जानिब तन्हा
वादों पे हर शब गुज़ार जाता हूँ
खिड़की के पार बगीचे होंगे
सोच के हर रोज़ ठहर जाता हूँ
©सुनील_सोनी
समाज का सबसे बड़ा सरोकार यानी प्रेम छीजता जा रहा है. लिहाजा, मेरी कविताओं में आपको प्रेम ही केंद्रबिंदु नज़र आएगा. मेरे और दो प्रिय विषय हैं : पहला सिनेमा और समाज; और दूसरा राजनीति के मार्फत समाज और समाज के मार्फत जन.
कविता : सुनील स्वर : अर्चना वीडियो संपादन : गार्गी
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