दिल पे कब ज़ुबां के आमाल चलते हैं
इश्क़ में हुज़ूर बस कमाल चलते हैं
मंदिर की घंटियाँ जोर से बजाईं तो
वो समझे कि हम बवाल करते हैं
समंदर की दहाड़ों पर हम रो दिए तो
फरेब हैं ये आंसू, कहकर चल दिए
©सुनील_सोनी
समाज का सबसे बड़ा सरोकार यानी प्रेम छीजता जा रहा है. लिहाजा, मेरी कविताओं में आपको प्रेम ही केंद्रबिंदु नज़र आएगा. मेरे और दो प्रिय विषय हैं : पहला सिनेमा और समाज; और दूसरा राजनीति के मार्फत समाज और समाज के मार्फत जन.
कविता : सुनील स्वर : अर्चना वीडियो संपादन : गार्गी
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