सोमवार, 4 जनवरी 2021

तंत्र

 तंत्र ने

गण को

बजाया

खूब 

तन्ना तू...

तन्ना तू...


भूखे पेट

जो सोये थे

दिल से उनके

निकला

हू... हू... हू...


संगीनों के

साये में जो

खामोश

खड़े रहे

करते

कूं... कूं... कूं...


ख़ुशबू

अलबत्ता

फिर भी

फूलों से

उठती रही


जिनकी नाक

ज़मीं पर थी

बूटों से

सजती रही


सीने में 

बिंधे रहे

तीर 


©सुनील_सोनी

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दिवाली की शुभकामनाएं

कविता : सुनील  स्वर : अर्चना वीडियो संपादन : गार्गी