लगता है यूं जैसे फूल साज़िशों से खिले हैं
इत्तफाक़ों के चमन में ऐसे सिलसिले हैं
वो यारो की बातें अदाकारी का वो फ़न
सिनेमा से भी बढ़कर ग़ज़ब सिलसिले हैं
सियासत में आजकल सितम खुशनुमां
मोहब्बत में जनाज़ों के लंबे सिलसिले हैं
वफ़ा के किस्से पत्थरों पर पानी से लिखे हैं
यक़ीं है मगर ताज़ा ज़ख्मों के सिलसिले हैं
मुझ तक ही लौट आती है आवाज़ मेरी
तिलिस्मी वादियों में अंधेरों के सिलसिले हैं
©SuneilSoni
©सुनील_सोनी
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