वीराने में सहमा-सा छू जाता है
कोई नहीं है बस तू याद आता है
यह नहीं कि तेरी याद में खोया हूँ
हवा चलती है तो तू याद आता है
बिजलियाँ चमकें या बरसात हो
सीने से लिपटा तू याद आता है
अभी साया कोई गुज़रा छूकर
हमसाया मुझे तू याद आता है
पेशानी से बोसा मिटाया नहीं है
आईना देखकर तू याद आता है
©SuneilSoni
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