ये वृक्ष जो
मूसलाधार में
सधे खड़े हैं
कृतज्ञ हैं
आकाश के
धरा की तृप्ति के लिए
जीवन तरने के लिए
आंधियाँ
विनम्रता की उपासक हैं
वृक्ष उनके शिष्य
ढहना
सफल होने का रास्ता है
सधे रहना समर्पण का
बारिश
आत्मा है सृष्टि की
©सुनील_सोनी
समाज का सबसे बड़ा सरोकार यानी प्रेम छीजता जा रहा है. लिहाजा, मेरी कविताओं में आपको प्रेम ही केंद्रबिंदु नज़र आएगा. मेरे और दो प्रिय विषय हैं : पहला सिनेमा और समाज; और दूसरा राजनीति के मार्फत समाज और समाज के मार्फत जन.
कविता : सुनील स्वर : अर्चना वीडियो संपादन : गार्गी
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