पुरानी होती जाती है जितनी
मोहब्बत सिर चढ़ती जाती है उतनी
तसव्वुर में ही है अभी महबूब मेरा
झाँकेगा तो खोल देंगे दिल की खिड़की
दिलफेंक कहो तो भी सुन लेंगे
आशिक़ न मानो तो भी सह लेंगे
नज़र भर देखो मुड़ने से पहले
बेवफ़ाई मानकर फिर जी लेंगे
उल्फ़त की जानिब जब कभी जाना हुआ
तुझे सोचता रहा, जिक्र भी करता रहा
इश्क़ का देखिए, कैसा ये तराना है !
जबां में खुशबू ओ आँखों में फ़साना है !!
यार के लब सुखन का मज़ा देते हैं
तू कहता है मेरे शे'र जवां होते हैं
बूँद खोएगी तो आसमां में जाएगी
बूँद बिखरेगी तो जमीं पर आएगी
दरवाज़े के दोनों पार गली थी
जहाँ से चली थी वहीं भली थी
© Sunil Soni
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