जहाँ तक देखो हरा है
शायद इसमें लाल भी पड़ा है
मटमैला हो गया वहां पर
जहां मेरा पसीना पड़ा है
सुर्ख उग आए से लगते हैं जो फूल
मां का सिंदूर वहां झड़ा है
©सुनील_सोनी
समाज का सबसे बड़ा सरोकार यानी प्रेम छीजता जा रहा है. लिहाजा, मेरी कविताओं में आपको प्रेम ही केंद्रबिंदु नज़र आएगा. मेरे और दो प्रिय विषय हैं : पहला सिनेमा और समाज; और दूसरा राजनीति के मार्फत समाज और समाज के मार्फत जन.
कविता : सुनील स्वर : अर्चना वीडियो संपादन : गार्गी
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें