सोमवार, 4 जनवरी 2021

जश्ने आज़ादी

ख़्याल ए आज़ादी से छा गईं रौनकें

आसमां पे देखिए तिरंगा लहराया है


कभी खेतों में कभी मैदां में झलकें

गंगा-जमुना में मुहब्बतों का साया है


खुशबुओं के दौर जो सांसों से गुज़रे 

चमन ए हिन्द में फूल कोई बौराया है


सरहदों से रुकते नहीं कभी झोंके

नाम ओ रुतबा ए गुल जहां पे छाया है


तारीख़ ए दौरां ए दुश्वारी के सफ़े मौजूं

इन बादलों के जाने का मौसम आया है


इंद्रधनुषों के पार सूरज ज्यों चमके

इल्म की रौशनी हिन्द का सरमाया है


@SuneilSoni

©सुनील_सोनी

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दिवाली की शुभकामनाएं

कविता : सुनील  स्वर : अर्चना वीडियो संपादन : गार्गी