ख़्याल ए आज़ादी से छा गईं रौनकें
आसमां पे देखिए तिरंगा लहराया है
कभी खेतों में कभी मैदां में झलकें
गंगा-जमुना में मुहब्बतों का साया है
खुशबुओं के दौर जो सांसों से गुज़रे
चमन ए हिन्द में फूल कोई बौराया है
सरहदों से रुकते नहीं कभी झोंके
नाम ओ रुतबा ए गुल जहां पे छाया है
तारीख़ ए दौरां ए दुश्वारी के सफ़े मौजूं
इन बादलों के जाने का मौसम आया है
इंद्रधनुषों के पार सूरज ज्यों चमके
इल्म की रौशनी हिन्द का सरमाया है
@SuneilSoni
©सुनील_सोनी
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