मेरी आँखों में अब जितना वीराना है
वही गली-कूचो का भी अब तराना है
मेरे दिल में अभी आँसू जो उभरा है
कबसे उसकी आँखों में भी वो ठहरा है
मेरे सीने से आती है जो उसकी सदा
मेरी वफ़ा भी उसकी धड़कन में रवां है
तड़पती बिजली जोश में बादल भी
बरस जाने की मेरी बेक़रारी भी जवां है
लाज़िम है उदासी का यूँ तारी हो जाना
मेरे हर रास्ते से वो कभी तो गुज़रा है
©सुनील_सोनी
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