धूप मेरे हिस्से की
बादल ले गया
इंद्रधनुष
बारिश के साथ मिलकर
बच्चों की खातिर रच गया
रात जैसा दिन में ही
घनघोर
मन भी गीला कर गया
दुःख भरा या सुख से हो तर
भेद बोता ही नहीं है
फिर विरह हो या मिलन
शेष रहता ही नहीं है
शुष्क जब भी
दिख पड़ेगा
श्याम में भी शुभ्र होगा
तब नहीं बिखेरेगा
इंद्रधनुष के रंग
बारिश का विरही
खाली बादल
©सुनील_सोनी
©suneilsoni
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