जहाँ से निश्चिंत गुजरते हैं लोग
वहाँ भरोसों के कब्रिस्तान पड़े हैं
जहाँ इस बार पुरजोर बरसे हैं बादल
वहाँ इस बार फसलों पर ख़तरे बड़े हैं
जहाँ दावा है सूरज की रोशनी का
उन इलाकों में अकाल भारी पड़े हैं
©सुनील_सोनी
समाज का सबसे बड़ा सरोकार यानी प्रेम छीजता जा रहा है. लिहाजा, मेरी कविताओं में आपको प्रेम ही केंद्रबिंदु नज़र आएगा. मेरे और दो प्रिय विषय हैं : पहला सिनेमा और समाज; और दूसरा राजनीति के मार्फत समाज और समाज के मार्फत जन.
कविता : सुनील स्वर : अर्चना वीडियो संपादन : गार्गी
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