सोमवार, 4 जनवरी 2021

तेरी बात (ग़ज़ल 5)


मेरी आँखों में अब जितना वीराना है

वही गली-कूचो का भी अब तराना है


मेरे दिल में अभी आँसू जो उभरा है

कबसे उसकी आँखों में भी वो ठहरा है


मेरे सीने से आती है जो उसकी सदा

मेरी वफ़ा भी उसकी धड़कन में रवां है


तड़पती बिजली जोश में बादल भी

बरस जाने की मेरी बेक़रारी भी जवां है


लाज़िम है उदासी का यूँ तारी हो जाना

मेरे हर रास्ते से वो कभी तो गुज़रा है


©सुनील_सोनी

इंटरनेट

 इश्क़ के मुक़ाबिल दुनिया इस तरह थी

आशिक़ ओ माशूक़ ने बरक़त बहुत की


वो छत पर नुमाया हम सड़क पर निकले

नज़रें लड़ाईं पलभर, उफ्फ़ की न उह की


बोलती बंद हमारी उनकी इंटरनेट ने यूँ की


©सुनील_सोनी


ये दिन (ग़ज़ल 4)


कट जाता है दिन, पर रात नहीं कटती
कट जाती है दुपहर, शाम नहीं कटती

फुर्र होती सुबह बच्चों के खेल में मुब्तिला
बेबस हूँ, मुए फ़ोन से दूरी नहीं घटती

शुक्र है कि रात तन्हा, अभी ख्वाब सोये हैं
तेरी यादों के बिन यां, क्या वरना गुज़रती

महकेंगे ज़माने फुरकत के, ख़ुशबू से
कहाँ भूला कस्तूरी थी तेरे आने से उठती

हिसाबों में पड़ा हूँ यूं कि न दिन कोई छूटे
तय है वस्ल, क्यों शब न हिज़्र की गुज़रती

©सुनील_सोनी

©suneilsoni





तू (ग़ज़ल)

वीराने में सहमा-सा छू जाता है

कोई नहीं है बस तू याद आता है

यह नहीं कि तेरी याद में खोया हूँ
हवा चलती है तो तू याद आता है

बिजलियाँ चमकें या बरसात हो
सीने से लिपटा तू याद आता है

अभी साया कोई गुज़रा छूकर
हमसाया मुझे तू याद आता है

पेशानी से बोसा मिटाया नहीं है
आईना देखकर तू याद आता है

©SuneilSoni

बेपरदा

लिख लूंगा फ़िर किसी दिन कविता

अभी फ़ुरसत से देख तो लूँ तुम्हें


©सुनील_सोनी

क्यों

 जो पैर ज़मीं पर नहीं पड़ते

उनका ज़मीं पर गुजारा क्योंकर हो?

जिन्होंने सपने नहीं देखे

उनका आसमां पर किनारा क्योंकर हो

जिन्होंने कभी नदी की रेत नहीं देखी

पहाड़ों का उन्हें नज़ारा क्योंकर हो


©सुनील_सोनी

ग़ज़ल (2) याद

 गश्त यूँ ही गली में लगती रही

मुश्क़ यूँ ही गली में फबती रही


यादों के सफ़र में मैं जगती रही

ख्वाबों के आईने में सजती रही


दिल ज़र्रा ज़र्रा यूँ फुदकता रहा

पेड़ पे कोई कोयल कूकती रही


गजरे से फूल आँगन में गिरते रहे

आंसुओं से गली मेरी सजती रही


तू चली आ कि बज़्म भरती नहीं

महफ़िल तेरे बिन बहकती नहीं

©सुनील_सोनी

©suneilsoni




दिवाली की शुभकामनाएं

कविता : सुनील  स्वर : अर्चना वीडियो संपादन : गार्गी