रविवार, 19 अगस्त 2018

उम्मीद

उम्मीद

चाँद को पहलू में लिये बैठा हूँ
दामन में रोशनी लिये बैठा हूँ

अँधेरे ज़िंदगी के ख़त्म नहीं होते
तनहा नहीं बैठा,भीड़ में बैठा हूँ

इबादतों के दौर गुज़रे जाते हैं बारिश नहीं होती
खाली नहीं बैठा, सजदे में बैठा हूँ

-सुनील

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दिवाली की शुभकामनाएं

कविता : सुनील  स्वर : अर्चना वीडियो संपादन : गार्गी