उम्मीद
चाँद को पहलू में लिये बैठा हूँ
दामन में रोशनी लिये बैठा हूँ
अँधेरे ज़िंदगी के ख़त्म नहीं होते
तनहा नहीं बैठा,भीड़ में बैठा हूँ
इबादतों के दौर गुज़रे जाते हैं बारिश नहीं होती
खाली नहीं बैठा, सजदे में बैठा हूँ
-सुनील
समाज का सबसे बड़ा सरोकार यानी प्रेम छीजता जा रहा है. लिहाजा, मेरी कविताओं में आपको प्रेम ही केंद्रबिंदु नज़र आएगा. मेरे और दो प्रिय विषय हैं : पहला सिनेमा और समाज; और दूसरा राजनीति के मार्फत समाज और समाज के मार्फत जन.
कविता : सुनील स्वर : अर्चना वीडियो संपादन : गार्गी
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