कान्स फिल्म मेला 2016
ये भारत भी कान्स में था मौजूद...
-सुनील सोनी
![]() |
| यही है वो ऐश्वर्य की बहुचर्चित लिपस्टिक |
यह ऐसी जगह है, जहां सिनेमा जगत से जुड़ी दुनियाभर की तमाम हस्तियां हाजिरी लगाती हैं. यूं, यह फिल्म मेला यूरोप और अमेरिका को ही तरजीह देता है, पर अफ्रीका और एशिया के लिए भी वहां थोड़ी बहुत जगह होती है. खासतौर पर उन सिनेकृतियों के लिए, जिन्हें आम तौर पर उनके अपने देशों में भी लोक तक पहुंचाने के लिए भीषण मशक्कत और दुश्वारियों से गुजरना पड़ता है.
![]() |
| सोनम कपूर |
मंटो फ्रांस में..
अचरज यह है कि नंदिता दास सआदत हसन ‘मंटो’ को लेकर कान्स हो आती हैं, पर बहुत लोगों को पता नहीं चलता.
ये हैं प्रातिनिधिक ‘भारतीय’ फिल्में
केवल नंदिता नहीं हैं, जिनकी चर्चा भारतीय सिने संसार में उस तरह नहीं हो रही है, जैसी होनी चाहिए, क्योंकि दरअसल कान्स में भारतीय उपमहाद्वीप की प्रातिनिधिक फिल्में तो यही हैं. इन फिल्मों में ‘गुढ़’, ‘दि सिनेमा ट्रैवलर्स’, ‘अ येलो बर्ड’ और ‘जागो हुआ सवेरा’ हैं. इनमें से पहली दो तो भारतीय हैं, पर शेष दो सिंगापुरी और पाकिस्तानी हैं.
चलिए जानते हैं उनके बारे में :
गुढ़ यानी घोंसला
![]() |
| गुढ़ का एक दृश्य |
दि सिनेमा ट्रैवलर्स
यह मूलत: 1:36 घंटे की डॉक्युमेंटरी है, जिसके निर्माता-निर्देशक शिरले अब्राहम और अमित मधेशिया हैं. इसे बनाने में उन्होंने तकरीबन 5 साल लगाए. जिन्होंने इस फिल्म को भारत की केव पिक्चर्स के मार्फत प्रस्तुत किया है. उसे कान्स के ‘क्लासिक’ खंड में ‘डॉक्युमेंटरी एबाउट सिनेमा’ कॉलम के तहत जगह मिली. यह भारत के गांव-कस्बों में मशहूर टूरिंग टॉकीज की कथा है, जो तकनीकी, सांख्यिक और जटिल परिवर्तनों के बावजूद लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. इसमें एक प्रोजेक्टर मरम्मत करनेवाला सूत्रधार है और उसे कविता, दर्शन तथा यथार्थवाद के मार्फत पेश करता है.जागो हुआ सवेरा / फैज़ अहमद फैज़ की पटकथा
![]() |
| जागो हुआ सवेरा का पोस्टर, जिसमें फैज़ का नाम है. |
पाकिस्तानी फिल्म है, जिसका अस्तित्व समाप्तप्राय: था. लेकिन, उसे पुनर्निर्मित किया गया और कान्स ने पुनर्निर्माण वाले खंड में उसे जगह दी. यह जानना बड़ा दिलचस्प है कि हिंदी नामवाली यह फिल्म आखिर पाकिस्तान की क्यों है?तो जानिए कि यह फिल्म जब बनी तो पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) पाकिस्तान का हिस्सा था. बांग्लादेश के मछुआरों की जिंदगी पर बनी इस फिल्म के निर्देशक ए.जे. कारदार हैं, जबकि संगीतकार तिमिर बरन और कहानीकार माणिक बंदोपाध्याय हैं. उसकी पटकथा खुद कारदार ने विश्वविख्यात शायर फैज अहमद फैज के साथ मिलकर लिखी. उसके कलाकारों में : खान अताउर रहमान, तृप्ति मित्र, मैना लतीफ, काजी खालिक, मोयना, जुरीन रक्षी, रोक्सी, रिजवान, नसीमा जैसे पुराने जमाने के कलाकार थे. 1958 में बनी और और 25 मई 1959 रिलीज हुई इस फिल्म को कान्स फिल्म मेले में नौमान तासीर फाउंडेशन ने पेश किया. चूंकि उसके निगेटिव गुम हो गए थे, इसलिए छाया और आवाज का पुनरुद्धार लंदन में डीलक्स रिस्टोरेशन में किया गया है. इस फाउंडेशन को अंजुम तासीर ने स्थापित किया है.
![]() |
| ए येलो बर्ड का पोस्टर |
ए येलो बर्ड
सिंगापुर में रहनेवाले भारतवंशी के. राजगोपाल की 1:52 घंटे की इस फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर कान्स फिल्म मेले में हुआ, पर उसका सबसे बड़ा आकर्षण भारतीय अभिनेत्री सीमा बिस्वास थीं. शिव नामक एक कैदी की पत्नी और बेटी को ढूंढने की यह करुणामयी कहानी ‘यथार्थवादी’ यानी रियलिस्टिक सिनेमा की तर्ज पर कही गई है. हालांकि, कान्स के सिने फाउंडेशन खंड में भी उसका चयन किया गया था.भारत कान्स में
बहरहाल, एक नजर इस पर भी डालें कि भारत का कान्स में क्या इतिहास रहा है :1.
1946 पॉम डि ओ (गोल्डन पाम) जीता
2.
वी. शांता राम की ‘आमार भूपाली’
1952, उत्कृष्ट साउंड रिकॉर्डिग
3.
विमल राय की दो बीघा जमीन
1954 अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार
4.
सत्यजीत राय की ‘पथेर पांचाली’
1956, पॉम डि ओ
![]() |
| सत्यजीत राय की फिल्म पथेर पांचाली का डाक टिकट |
मृणाल सेन की ‘खारिज’
1983, स्पेशल जूरी पुरस्कार
6.
मीरा नायर की ‘सलाम बॉम्बे’
1988, कैमेरा डि ओ
7.
मुरली नायर की ‘मरण सिंहासनम्’
1999, कैमरा डि ओ पॉम डि ओर
8.
1948 में बनी उदय शंकर (गुरुदत्त के बड़े भाई) की ‘कल्पना’ को मार्टिन स्कोरसिसी के वर्ल्ड सिनेमा फाउंडेशन ने 2010 में रिस्टोर किया और 2012 में उसे कान्स में दिखाया गया.
9.
2010 में विक्रमादित्य मोटवानी की फिल्म ‘उड़ान’ ऐसी पहली हिंदी फिल्म थी, जो ‘अनसर्टन रिगार्ड’ खंड में दिखाई गई.
10.
2011 में श्रीलंकाई निर्देशक विमुक्ति जयसुंदर की बंगाली फिल्म ‘छत्रक’ ने डायरेक्टर्स फॉर्टनाइट खंड में स्टैंडिंग ओवेशन पाया.
11.
2012 में असीम अहलुवालिया की ‘मिस लवली’ और अनुराग कश्यप की ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ के दो खंड दिखाए गए. तीनों में नवाजुद्दीन सिद्दीकी प्रमुख भूमिका में थे.








कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें